कैसे नहीं गिरते उपग्रह? आर्टेमिस-2 मिशन की सफलता और अंतरिक्ष की रोचक दुनिया

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Orion Capsule and Earth Orbit

मिशन: आर्टेमिस-2 | विषय: कक्षीय यांत्रिकी और सुरक्षा नियम | अनुमानित बजट: $93 बिलियन (2025 तक)

नासा का आर्टेमिस-2 मिशन 50 साल बाद इंसानों को चंद्रमा के पास ले जाने का एक ऐतिहासिक प्रयास था। हाल ही में भारत के चंद्रयान-3 जैसे मिशन सफल हुए हैं, लेकिन वे सभी मानव रहित (unmanned) थे। आर्टेमिस-2 इनसे बिल्कुल अलग था — यह मिशन 4 अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा में ले गया, जो ओरायन कैप्सूल में बैठकर इस ऐतिहासिक यात्रा का अनुभव कर चुके हैं। इस मिशन ने न केवल अन्वेषण के नए युग की शुरुआत की, बल्कि गहरे अंतरिक्ष में मानव जीवन समर्थन प्रणालियों, सुरक्षा और जटिल इंजीनियरिंग का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस ब्लॉग में हम मिशन की लागत और उपग्रहों के सुरक्षित संचालन के विज्ञान को समझेंगे। आधिकारिक विवरण यहाँ देखें

लागत (Cost of Discovery)

आर्टेमिस कार्यक्रम एक दीर्घकालिक निवेश है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नासा ने इसके विकास पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं:

  • आर्टेमिस-2 लागत: इस व्यक्तिगत मिशन की लागत लगभग 4 बिलियन डॉलर से अधिक आंकी गई है।
  • कुल कार्यक्रम बजट: पूरे आर्टेमिस कार्यक्रम का 2025 तक का अनुमानित बजट 93 बिलियन डॉलर के आसपास पहुँचने की संभावना है।

क्या आपने कभी सोचा है? उपग्रह हवा में क्यों नहीं गिरते?

एक रोचक पहेली: जब आप पत्थर को ऊपर फेंकते हैं, तो वह वापस नीचे गिर जाता है। चाँद अरबों सालों से पृथ्वी के चारों ओर घूम रहा है, लेकिन नीचे क्यों नहीं गिरता? और उपग्रह? वे भी तो नहीं गिरते! आखिर क्यों?

जवाब है — "कक्षीय वेग" (Orbital Velocity)!

जब कोई उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, तो वह लगातार पृथ्वी की ओर गिर रहा होता है — लेकिन वह इतनी तेज़ी से आगे भी बढ़ रहा होता है कि पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से पहले ही वह "चूक" जाता है! इसे ऐसे समझिए:

  • पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति उपग्रह को नीचे खींचती है
  • लेकिन उपग्रह की तेज़ गति उसे आगे की ओर धकेलती है
  • ये दोनों ताकतें एक-दूसरे को संतुलित कर देती हैं — और उपग्रह न तो नीचे गिरता है, न ही अंतरिक्ष में उड़ जाता है
  • यह एक "नियंत्रित गिरावट" है — जैसे आप किसी गोल कमरे में दौड़ रहे हों और दीवारें आपको गिरने न दे रही हों!
उपग्रह कैसे लॉन्च होते हैं?

उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुँचाने के लिए रॉकेट का उपयोग किया जाता है। रॉकेट उपग्रह को पृथ्वी के वायुमंडल से ऊपर ले जाता है और फिर एक निश्चित गति से छोड़ देता है। यह गति इतनी सटीक होती है कि उपग्रह अपनी कक्षा में स्थिर हो जाता है।

कक्षीय वेग (Orbital Velocity) क्या है?

कक्षीय वेग वह न्यूनतम गति है जिस पर कोई उपग्रह पृथ्वी के चारों ओर स्थिर कक्षा में बना रह सकता है। यह गति पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति और उपग्रह की गतिज ऊर्जा के बीच का संतुलन है।

कक्षा ऊँचाई कक्षीय वेग क्यों?
LEO (निचली कक्षा) 160-2,000 किमी ~28,000 किमी/घंटा पृथ्वी के करीब = ज्यादा गुरुत्वाकर्षण = ज्यादा गति चाहिए
MEO (मध्यम कक्षा) 2,000-35,786 किमी ~14,000 किमी/घंटा बीच की ऊँचाई = बीच की गति
GEO (भू-स्थिर कक्षा) 35,786 किमी ~11,000 किमी/घंटा दूर = कम गुरुत्वाकर्षण = कम गति काफी है

रोचक तथ्य: LEO में उपग्रह इतनी तेज़ी से भागते हैं कि वे पृथ्वी की एक परिक्रमा सिर्फ 90 मिनट में पूरी कर लेते हैं! यानी वे हर 90 मिनट में सूरज को देखते हैं — एक दिन में 16 सूरजोदय!

भाग 1: पृथ्वी की कक्षाओं (Orbits) में अंतर

पृथ्वी के चारों ओर उपग्रहों को उनकी ऊँचाई और उपयोग के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:

कक्षा का प्रकार ऊँचाई (सतह से ऊपर) परिक्रमा अवधि मुख्य उपयोग
निचली कक्षा (LEO) 160 किमी से 2,000 किमी 90 - 120 मिनट ISS, स्टारलिंक, जासूसी उपग्रह
मध्यम कक्षा (MEO) 2,000 किमी से 35,786 किमी 2 - 24 घंटे GPS, नेविगेशन उपग्रह
भू-स्थिर कक्षा (GEO) ठीक 35,786 किमी 24 घंटे मौसम, TV (DTH) प्रसारण

मुख्य अंतर: LEO में उपग्रह बहुत तेज़ चलते हैं, जबकि GEO में वे पृथ्वी की गति के साथ तालमेल बिठाकर एक ही स्थान पर स्थिर दिखाई देते हैं।

भाग 2: LEO उपग्रहों के गिरने से जुड़े सुरक्षा नियम

यह चिंता जायज़ है कि क्या गिरते हुए उपग्रह जान-माल का नुकसान कर सकते हैं। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष संधियाँ निम्नलिखित कठोर नियम अपनाती हैं:

1. नियंत्रित वातावरण में जल जाना (Controlled Burn-up)

जब उपग्रह वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण (Friction) के कारण अत्यधिक तापमान पैदा होता है। छोटे और मध्यम उपग्रह ओरायन कैप्सूल की तरह 2,760°C का तापमान झेलने के बजाय हवा में ही जलकर बिखर जाते हैं।

2. निर्देशित स्प्लैशडाउन (Controlled Deorbiting)

बड़े उपग्रहों के लिए जो पूरी तरह नहीं जल सकते, उन्हें "अंतरिक्ष यान कब्रिस्तान" (Spacecraft Cemetery) में गिराया जाता है:

  • दक्षिण प्रशांत महासागर निर्जन क्षेत्र: यह पृथ्वी का वह सुदूर हिस्सा है जहाँ कोई आबादी या जहाजों का रास्ता नहीं है।
  • पैंतरेबाज़ी: उपग्रह के बचे हुए ईंधन का उपयोग करके उसे जानबूझकर इसी सुरक्षित क्षेत्र में गिरने के लिए निर्देशित किया जाता है।
3. अंतर्राष्ट्रीय '25-वर्षीय नियम'

मलबे को नियंत्रित करने के लिए यह अनिवार्य है कि LEO कक्षा के उपग्रह मिशन खत्म होने के 25 वर्षों के भीतर कक्षा से हटा दिए जाएं। या तो उन्हें जला दिया जाए या "कचरा कक्षा" (Graveyard Orbit) में भेज दिया जाए।

नोट: इन नियमों के कारण, किसी उपग्रह के आबादी वाले क्षेत्र में गिरने की संभावना लगभग नगण्य होती है।

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अंतरिक्ष यात्री: वे साहसी यात्री जो अंतरिक्ष गए और लौटे (या नहीं लौटे)

अंतरिक्ष यात्रा एक साहसिक कार्य है। अब तक सैकड़ों अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जा चुके हैं। यहाँ कुछ प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्रियों की सूची है:

अंतरिक्ष यात्री देश मिशन वर्ष कहाँ गए? स्थिति
यूरी गगारिन सोवियत संघ (रूस) वोस्तोक-1 1961 पृथ्वी कक्षा (LEO) ✅ वापस लौटे
नील आर्मस्ट्रांग अमेरिका अपोलो-11 1969 🌙 चंद्रमा की सतह ✅ वापस लौटे (चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति)
बज़ एल्ड्रिन अमेरिका अपोलो-11 1969 🌙 चंद्रमा की सतह ✅ वापस लौटे
राकेश शर्मा भारत सोयुज T-11 1984 पृथ्वी कक्षा (ISS) ✅ वापस लौटे (पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री)
कल्पना चावला भारत/अमेरिका कोलंबिया (STS-107) 2003 पृथ्वी कक्षा (LEO) ❌ वापस नहीं लौटे (मिशन के दौरान शहीद)
रीता कत्रक भारत/अमेरिका डिस्कवरी (STS-95) 1998 पृथ्वी कक्षा (LEO) ✅ वापस लौटे
क्रिस्टिना कोच अमेरिका ISS (Expedition 59-61) 2019-2020 पृथ्वी कक्षा (ISS) ✅ वापस लौटे (महिलाओं का सबसे लंबा एकल मिशन - 328 दिन)
गगनयात्री (भारत) भारत गगनयात्रा-1 2025 (योजना) पृथ्वी कक्षा (LEO) ⏳ आगामी मिशन
आर्टेमिस-2 क्रू अमेरिका/कनाडा आर्टेमिस-2 2024 🌙 चंद्रमा कक्षा ✅ वापस लौटे (4 अंतरिक्ष यात्री: रीद वाइजमैन, विक्टर ग्रोवर, क्रिस्टिना कोच, जेरेमी हानसेन)

🫡 श्रद्धांजलि: उन सभी अंतरिक्ष यात्रियों को नमन जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान में अपने प्राण न्योछावर किए। उनकी वीरता ने ही मानव जाति को अंतरिक्ष की ओर बढ़ने का साहस दिया है। विशेष रूप से कल्पना चावला और कोलंबिया मिशन के सभी 7 सदस्यों को श्रद्धांजलि।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. क्या कोई उपग्रह आबादी पर गिर सकता है?
A: अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों और निर्देशित डीऑर्बिटिंग के कारण इसकी संभावना बहुत कम है। बड़े यान सुदूर महासागरों में गिराए जाते हैं।

Q2. ग्रेवयार्ड ऑर्बिट (Graveyard Orbit) क्या है?
A: यह सक्रिय उपग्रहों की कक्षा से बहुत ऊपर एक ऐसी जगह है जहाँ बेकार हो चुके उपग्रहों को 'पार्क' कर दिया जाता है ताकि वे दूसरों से न टकराएं।

Q3. आर्टेमिस मिशन पर इतना खर्च क्यों हुआ?
A: यह केवल चंद्रमा की यात्रा नहीं थी, बल्कि मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने के लिए आवश्यक नई तकनीक और जीवन रक्षक प्रणालियों के विकास का निवेश था।

Q4. आर्टेमिस-2 मिशन में कितने अंतरिक्ष यात्री गए थे?
A: आर्टेमिस-2 में 4 अंतरिक्ष यात्री गए थे जो चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा कर चुके हैं और सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आए हैं। यह 1972 के अपोलो-17 के बाद पहली बार हुआ था।

Q5. चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने में कितना समय लगा?
A: आर्टेमिस-2 मिशन लगभग 10 दिनों का था। लॉन्च के 3-4 दिन बाद चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया था।

Q6. अंतरिक्ष मलबा (Space Debris) कितना खतरनाक है?
A: 1 सेमी से छोटा मलबा भी 28,000 किमी/घंटे की रफ्तार से चलता है, जो गोली से 10 गुना तेज है। इसीलिए ISS को नियमित रूप से मलबे से बचाने के लिए कक्षा बदलनी पड़ती है।

Q7. आर्टेमिस-3 कब लॉन्च होगा?
A: आर्टेमिस-3, जो 2027 के अंत में लॉन्च होने की योजना है, यह मिशन चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यात्रियों को उतारेगा, जिसमें पहली महिला और पहले गैर-श्वेत अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे।

Q8. भारत का इस मिशन में क्या योगदान है?
A: भारत के चंद्रयान मिशनों ने चंद्रमा की सतह और दक्षिण ध्रुव पर पानी की खोज में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान किया, जो आर्टेमिस मिशन की योजना बनाने में सहायक है।

Q9. कोलंबिया दुर्घटना (2003) में कल्पना चावला और 6 अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की मौत कैसे हुई?
A: तकनीकी कारण: लॉन्च के दौरान, शटल के बाहरी ईंधन टैंक से फोम इंसुलेशन का एक टुकड़ा (suitcase-sized foam debris) टूटकर बाएं पंख (left wing) से टकराया। इस टक्कर ने पंख की थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम (TPS) को नुकसान पहुंचाया — विशेष रूप से कार्बन-कार्बन पैनल को।

वापसी के दौरान क्या हुआ: जब कोलंबिया पृथ्वी के वायुमंडल में वापस आ रहा था, तो उसकी गति 28,000 किमी/घंटा थी और बाहरी तापमान 1,400°C से अधिक तक पहुँच गया। क्षतिग्रस्त पंख के माध्यम से अत्यधिक गर्म गैसें (superheated plasma) अंदर घुस गईं, जिससे पंख पिघलने लगा और अंतरिक्ष यान संरचनात्मक रूप से विफल हो गया। 1 फरवरी 2003 को, कोलंबिया टेक्सास के ऊपर 60 किमी की ऊँचाई पर टूट गया, और सभी 7 अंतरिक्ष यात्री शहीद हो गए।

सीख: इस दुर्घटना के बाद नासा ने शटल की सुरक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार किए और थर्मल शील्ड की जाँच को अनिवार्य बनाया।

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