मिशन: आर्टेमिस-2 | विषय: कक्षीय यांत्रिकी और सुरक्षा नियम | अनुमानित बजट: $93 बिलियन (2025 तक)
नासा का आर्टेमिस-2 मिशन 50 साल बाद इंसानों को चंद्रमा के पास ले जाने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। यह मिशन न केवल अन्वेषण के नए युग की शुरुआत करता है, बल्कि गहरे अंतरिक्ष में जीवन समर्थन प्रणालियों और जटिल इंजीनियरिंग का भी परीक्षण करता है। इस ब्लॉग में हम मिशन की लागत और उपग्रहों के सुरक्षित संचालन के विज्ञान को समझेंगे। आधिकारिक विवरण यहाँ देखें
4. लागत (Cost of Discovery)
आर्टेमिस कार्यक्रम एक दीर्घकालिक निवेश है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नासा ने इसके विकास पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं:
- आर्टेमिस-2 लागत: इस व्यक्तिगत मिशन की लागत लगभग 4 बिलियन डॉलर से अधिक आंकी गई है।
- कुल कार्यक्रम बजट: पूरे आर्टेमिस कार्यक्रम का 2025 तक का अनुमानित बजट 93 बिलियन डॉलर के आसपास पहुँचने की संभावना है।
भाग 1: पृथ्वी की कक्षाओं (Orbits) में अंतर
पृथ्वी के चारों ओर उपग्रहों को उनकी ऊँचाई और उपयोग के आधार पर तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:
| कक्षा का प्रकार | ऊँचाई (सतह से ऊपर) | परिक्रमा अवधि | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| निचली कक्षा (LEO) | 160 किमी से 2,000 किमी | 90 - 120 मिनट | ISS, स्टारलिंक, जासूसी उपग्रह |
| मध्यम कक्षा (MEO) | 2,000 किमी से 35,786 किमी | 2 - 24 घंटे | GPS, नेविगेशन उपग्रह |
| भू-स्थिर कक्षा (GEO) | ठीक 35,786 किमी | 24 घंटे | मौसम, TV (DTH) प्रसारण |
मुख्य अंतर: LEO में उपग्रह बहुत तेज़ चलते हैं, जबकि GEO में वे पृथ्वी की गति के साथ तालमेल बिठाकर एक ही स्थान पर स्थिर दिखाई देते हैं।
भाग 2: LEO उपग्रहों के गिरने से जुड़े सुरक्षा नियम
यह चिंता जायज़ है कि क्या गिरते हुए उपग्रह जान-माल का नुकसान कर सकते हैं। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष संधियाँ निम्नलिखित कठोर नियम अपनाती हैं:
1. नियंत्रित वातावरण में जल जाना (Controlled Burn-up)
जब उपग्रह वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण (Friction) के कारण अत्यधिक तापमान पैदा होता है। छोटे और मध्यम उपग्रह ओरायन कैप्सूल की तरह 2,760°C का तापमान झेलने के बजाय हवा में ही जलकर बिखर जाते हैं।
2. निर्देशित स्प्लैशडाउन (Controlled Deorbiting)
बड़े उपग्रहों के लिए जो पूरी तरह नहीं जल सकते, उन्हें "अंतरिक्ष यान कब्रिस्तान" (Spacecraft Cemetery) में गिराया जाता है:
- दक्षिण प्रशांत महासागर निर्जन क्षेत्र: यह पृथ्वी का वह सुदूर हिस्सा है जहाँ कोई आबादी या जहाजों का रास्ता नहीं है।
- पैंतरेबाज़ी: उपग्रह के बचे हुए ईंधन का उपयोग करके उसे जानबूझकर इसी सुरक्षित क्षेत्र में गिरने के लिए निर्देशित किया जाता है।
3. अंतर्राष्ट्रीय '25-वर्षीय नियम'
मलबे को नियंत्रित करने के लिए यह अनिवार्य है कि LEO कक्षा के उपग्रह मिशन खत्म होने के 25 वर्षों के भीतर कक्षा से हटा दिए जाएं। या तो उन्हें जला दिया जाए या "कचरा कक्षा" (Graveyard Orbit) में भेज दिया जाए।
नोट: इन नियमों के कारण, किसी उपग्रह के आबादी वाले क्षेत्र में गिरने की संभावना लगभग नगण्य होती है।
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📢 महत्वपूर्ण सूचना - अंतरिक्ष सुरक्षा
आर्टेमिस-2 कैप्सूल भी इसी वैज्ञानिक पद्धति का पालन करते हुए प्रशांत महासागर में सुरक्षित 'स्प्लैशडाउन' करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. क्या कोई उपग्रह आबादी पर गिर सकता है?
A: अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों और निर्देशित डीऑर्बिटिंग के कारण इसकी संभावना बहुत कम है। बड़े यान सुदूर महासागरों में गिराए जाते हैं।
Q2. ग्रेवयार्ड ऑर्बिट (Graveyard Orbit) क्या है?
A: यह सक्रिय उपग्रहों की कक्षा से बहुत ऊपर एक ऐसी जगह है जहाँ बेकार हो चुके उपग्रहों को 'पार्क' कर दिया जाता है ताकि वे दूसरों से न टकराएं।
Q3. आर्टेमिस मिशन पर इतना खर्च क्यों हो रहा है?
A: यह केवल चंद्रमा की यात्रा नहीं है, बल्कि मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने के लिए आवश्यक नई तकनीक और जीवन रक्षक प्रणालियों के विकास का निवेश है।

